अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि अस्थमा इसलिए होती है क्योंकि अलर्जन हवा की नली में संवेदी तंत्रिकाओं को उत्तेजित कर देता है। इसके बाद यह तंत्रिकाएं एक श्रृखला प्रतिक्रिया शुरू कर देती हैं जिससे न्यूरोट्रांसमिटर ऎसटाइकोलीन का स्त्राव होता है जो हवा की नलिकाओं को संकुचित कर देता है।
लंदन की इंपीरियल कॉलेज की एक टीम ने चूहों पर शोधकर पाया है कि अस्थमा के दौरे को एक सेंसरी अस्थमा प्रतिक्र्रिया को विलंबित कर दबाया जा सकता है।
अब यह टेक्नोलॉजी अस्थमा के रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
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