Wednesday, 24 August 2011

अरे हुजूर, जानिए जरूर, बहुत गुणकारी है खजूर


 
सीकर. ‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।’ कबीरदास की ये पंक्तियां अमूमन नजीर पेश करने में दी जाती है। इसके इतर बहुत थोड़े लोग जानते हैं कि अरब देशों में खजूर को ‘जीवनदाता पेड़’ और ‘नखलिस्तान का बादशाह (किंग ऑफ ओएसिस)’ नामों से पुकारा जाता है। खजूर के पेड़ का प्रत्येक भाग उपयोगी होता है। इसका तना लकड़ियां प्रदान करता है। पत्तियां फेब्रिक्स, रस्से व बास्केट बनाने के काम आते हैं। इसकी गुठलियों को विशेष विधि से नरम बनाने के बाद पशुओं को उत्तम प्रकार के चारे के रूप में खिलाया जाता है।

खजूर फल के पौष्टिक गुणों के कारण ही दुनिया भर के मुसलमान दिन भर रोजा रखने के बाद इफ्तार के समय खजूर का सेवन अवश्य करते हैं। पैगम्बर मोहम्मद ने भी खजूर से रोजा खोलना सुन्नत बताया है। खजूर मीठे और स्वादिष्ट होने के साथ ही लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं।एक किलो खजूर हमारे शरीर को 3500 कैलोरी ऊर्जा प्रदान करते हैं। दिन भर रोजा रखने के बाद तुरंत ऊर्जा प्राप्त करने के लिए खजूर सवरेत्तम है।

खजूर के रासायनिक घटक

विज्ञान विषय के अध्यापक खालिद अख्तर ने बताया कि खजूर में 70 फीसदी शर्करा होती है जिनमें ग्लूकोज व फ्रैक्टोज मुख्य हैं।ये कई खनिज लवणों जैसे आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, सल्फर, कॉपर, कैल्शियम, फास्फोरस का मुख्य स्रोत है।

खजूर के और नाम

खजूर का वनस्पति नाम फानिक्स डेक्टाइलीफेरा है। हिंदी और उर्दू में इसे खजूर, फारसी में खुरमा, संस्कृत में खर्जुर और बंगाली में खेजुर कहा जाता है। विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के एक सर्वे के अनुसार विश्व में लगभग 100 मिलियन खजूर के पेड़ हैं, इसमें से 65 फीसदी केवल अरब देशों में मौजूद हैं।

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