जब शरीर की कोशिकाएं ऑक्सीजन का प्रयोग करती हैं तो प्राकृतिक तरीके से फ्री रेडिकल्स का निर्माण होता है, जिससे कोशिकाओं को क्षति भी पहुंचती है। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट्स इन दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जरूरी होते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट्स के फायदे
फलों व सब्जियों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले न्यूट्रिशंस के समान ही एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। यह मानव शरीर की कोशिकाओं को पहुंचने वाली क्षति को रोकने के साथ ही उनके नवीनीकरण के लिए भी जरूरी होते हैं।
1. यह बाहरी संक्रमणों, वायरस, फ्लू से बचाव करने में सहायक होते हैं।
2. यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की आशंका को कम कर सकते हैं।
3. ग्लूकोमा और मस्क्यूलर डिजनरेशन का खतरा कम होता है।
4. यह एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बनाए रखते हैं, जो हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है। इनसे हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है।
5. उम्र बढ़ने पर शरीर की कोशिकाओं को होने वाली क्षति को रोकने और उनके नवीनीकरण में सहायक होते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट्स के प्रकार
विटामिन ए: यह फैट-सॉल्यूबल विटामिन है, जो हड्डियों, गैस्ट्रोइंटेस्टिनल, आंखों, त्वचा और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद है। गाजर, शकरकंद, एप्रिकोट, संतरा, आम, अमरूद, पपीता, दूध, योगर्ट और अंडे के पीले हिस्से में भरपूर विटामिन ए पाया जाता है।
विटामिन सी: यह विटामिन फ्री रेडिकल्स से निजात दिलाता है, जो कोशिकाओं के भीतर मौजूद होते हंै। फ्री रेडिकल्स बढ़ती उम्र के प्रभावों को दर्शाने के लिए जिम्मेदार होता है। विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत संतरा, मौसंबी, नींबू, हरी मिर्च, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्ट्रॉबैरी और टमाटर है।
विटामिन ई: यह भी फैट-सॉल्यूबल विटामिन है, जो सेल मैंब्रेंस को फ्री रेडिकल्स से होने वाली क्षति से बचाता है। सूखे मेवे, सभी प्रकार के अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और वनस्पतितेल इसके बेहतरीन स्रोत हैं।
सेलेनियम: यह एक प्रकार का खनिज पदार्थ है, जिसका सेवन निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका ज्यादा डोज खतरनाक भी हो सकता है। सभी प्रकार के अनाज, अंडे और लहसुन में सेलेनियम भरपूर मात्रा में मिलता है।
बीटा-कैरोटिन: यह गाजर, फूलगोभी, शकरकंद, आम, लाल और पीली मिर्च में पाया जाता है। यह फ्री रेडिकल्स के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है।
लाइकोपिन: यह एंटीऑक्सीडेंट बीटा-कैरोटिन के समान ही काम करता है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं पर फ्री रेडिकल्स के बुरे प्रभावों को बेअसर करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि लाइकोपिन से प्रोस्टेट और सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी काफी कम हो सकता है। साथ ही यह हृदय रोगों का खतरा कम करने में भी कारगर है। यह एलडीएल (बुरे) कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण करने में मदद करता है। यह बीटा-कैरोटिन के साथ मिलकर त्वचा के लिए काम करता है और अल्ट्रा वायलेट रेडिएशंस के प्रभावों से बचाता है। लाइकोपिन का बेहतरीन स्रोत तरबूज, टमाटर और इससे तैयार खाद्य पदार्थ हैं। लाइकोपिन का मुख्य काम उपरोक्त खाद्य पदार्थो को लाल रंगत प्रदान करना भी है।
ल्यूटेन: उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मस्क्यूलर डिजनरेशन की समस्या और ग्लूकोमा जैसे नेत्र विकारों से बचने के लिए ल्यूटेन नामक एंटीऑक्सीडेंट बहुत जरूरी है। पत्तागोभी, पालक, मेथी, चौलाई जैसी हरी सब्जियों और किवी में भरपूर ल्यूटेन होता है।
एंटीऑक्सीडेंट्स के फायदे
फलों व सब्जियों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले न्यूट्रिशंस के समान ही एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। यह मानव शरीर की कोशिकाओं को पहुंचने वाली क्षति को रोकने के साथ ही उनके नवीनीकरण के लिए भी जरूरी होते हैं।
1. यह बाहरी संक्रमणों, वायरस, फ्लू से बचाव करने में सहायक होते हैं।
2. यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की आशंका को कम कर सकते हैं।
3. ग्लूकोमा और मस्क्यूलर डिजनरेशन का खतरा कम होता है।
4. यह एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बनाए रखते हैं, जो हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है। इनसे हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है।
5. उम्र बढ़ने पर शरीर की कोशिकाओं को होने वाली क्षति को रोकने और उनके नवीनीकरण में सहायक होते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट्स के प्रकार
विटामिन ए: यह फैट-सॉल्यूबल विटामिन है, जो हड्डियों, गैस्ट्रोइंटेस्टिनल, आंखों, त्वचा और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद है। गाजर, शकरकंद, एप्रिकोट, संतरा, आम, अमरूद, पपीता, दूध, योगर्ट और अंडे के पीले हिस्से में भरपूर विटामिन ए पाया जाता है।
विटामिन सी: यह विटामिन फ्री रेडिकल्स से निजात दिलाता है, जो कोशिकाओं के भीतर मौजूद होते हंै। फ्री रेडिकल्स बढ़ती उम्र के प्रभावों को दर्शाने के लिए जिम्मेदार होता है। विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत संतरा, मौसंबी, नींबू, हरी मिर्च, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्ट्रॉबैरी और टमाटर है।
विटामिन ई: यह भी फैट-सॉल्यूबल विटामिन है, जो सेल मैंब्रेंस को फ्री रेडिकल्स से होने वाली क्षति से बचाता है। सूखे मेवे, सभी प्रकार के अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और वनस्पतितेल इसके बेहतरीन स्रोत हैं।
सेलेनियम: यह एक प्रकार का खनिज पदार्थ है, जिसका सेवन निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका ज्यादा डोज खतरनाक भी हो सकता है। सभी प्रकार के अनाज, अंडे और लहसुन में सेलेनियम भरपूर मात्रा में मिलता है।
बीटा-कैरोटिन: यह गाजर, फूलगोभी, शकरकंद, आम, लाल और पीली मिर्च में पाया जाता है। यह फ्री रेडिकल्स के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है।
लाइकोपिन: यह एंटीऑक्सीडेंट बीटा-कैरोटिन के समान ही काम करता है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं पर फ्री रेडिकल्स के बुरे प्रभावों को बेअसर करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि लाइकोपिन से प्रोस्टेट और सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी काफी कम हो सकता है। साथ ही यह हृदय रोगों का खतरा कम करने में भी कारगर है। यह एलडीएल (बुरे) कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण करने में मदद करता है। यह बीटा-कैरोटिन के साथ मिलकर त्वचा के लिए काम करता है और अल्ट्रा वायलेट रेडिएशंस के प्रभावों से बचाता है। लाइकोपिन का बेहतरीन स्रोत तरबूज, टमाटर और इससे तैयार खाद्य पदार्थ हैं। लाइकोपिन का मुख्य काम उपरोक्त खाद्य पदार्थो को लाल रंगत प्रदान करना भी है।
ल्यूटेन: उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मस्क्यूलर डिजनरेशन की समस्या और ग्लूकोमा जैसे नेत्र विकारों से बचने के लिए ल्यूटेन नामक एंटीऑक्सीडेंट बहुत जरूरी है। पत्तागोभी, पालक, मेथी, चौलाई जैसी हरी सब्जियों और किवी में भरपूर ल्यूटेन होता है।
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