Thursday, 18 August 2011

अगर हमेशा खुश रहना है तो यह करें


खुश रहने के कई तरीके हैं। सांसारिक माध्यम से जब हम खुश रहते हैं तो एक दिक्कत आती है। वह माध्यम खत्म हुआ और हम पुन: दुखी हो जाते हैं। क्लब गए, टीवी देखी, खेल खेला और जब उनसे दूर हटे तो वापस अशांत हो गए। कुछ स्थायी इलाज ढूंढ़ने होंगे। अपनी निजी और आंतरिक वृत्तियों में इसके सहारे ढूंढ़े जाएं। यदि स्थायी रूप से प्रसन्न रहना है तो अपने आंतरिक सुख को पकड़ें।



जो लोग इस संसार में स्थायी रूप से प्रसन्न रहे हैं, उन्होंने अपने अकेलेपन को ठीक से समझा है और उसका एक बड़ा लाभ यह उठाया है कि उस अकेलेपन के दौरान अपनी भीतरी शक्तियों को विकसित कर लिया, क्योंकि ऐसा करने के लिए थोड़ा संसार से कटना जरूरी हो जाता है।



भीतरी सुख थोड़ा सहज होता है, लेकिन सांसारिक सुख में एक उत्तेजना होती है। मजेदार बात यह है कि इस संसार का दुख भी उत्तेजित करता है और सुख भी, लेकिन इन दोनों को जब अपनी भीतरी शक्तियों से जोड़ दें तो भीतर न सुख होता है, न दुख और इन दोनों के पार की स्थिति है शांति।



परमात्मा ने हर व्यक्ति की समझदारी का एक आंतरिक तल तय कर दिया है। आप जितनी जल्दी उस तल तक पहुंच जाएंगे, उतने शीघ्र शांत हो सकेंगे। आप सुख और दुख दोनों को भोग रहे होते हैं, लेकिन उत्तेजित नहीं रहते। ऐसी शांति सुगंध बनकर आपके व्यक्तित्व से झरती है और उस घेरे में आने वाले अन्य व्यक्तियों को महसूस भी होती है।

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